एक विश्वविद्यालय ऐसा भी...
हमारे देश में एक नामी विश्वविद्यालय है, इन दिनों काफी चर्चा में है। चौंकिये
मत! चर्चा कोई विश्व के श्रेष्ठतम सौ
विश्वविद्यालय में शामिल होने या कोई अदभूत अविष्कार के लिए नहीं है...बल्कि कुछ
और है...
पता है कि नहीं आपलोंगो को, कि.. इस विश्वविद्यालय में इजराइल, फिलीस्तिन से
लेकर न जाने किन-किन देश की चर्चाएं होती है (सिर्फ अपने देश को छोड़कर)......इस
विश्वविद्यालय ने एक से बढ़कर एक नेता, नौकरशाह समाजसेवी भी दिया है। इस विश्वविद्यालय
की स्थापना का उद्देश्य भारत को विश्व के श्रेष्ठ विश्वविद्यालय की श्रेणी में
लाने को लेकर था...(जैसे- कभी हमारे यहां नालंदा विश्वविद्यालय हुआ करता था। लेकिन
दुर्भाग्य से ऐसा न हो सका...)
खैर! छौड़िये इन सब बातों को... नहीं तो आपको
एबीवीपी, संघ या भाजपाई का दर्जा दे दिया जायेगा। इस विश्वविद्यालय में अपने देश
के विरोध में कुछ खास गुटों के द्वारा समय-समय पर खुब संगोष्ठी/सेमिनार आयोजित किए
जाते हैं। जेंडर जस्टीस से लेकर..कश्मीर की आजादी तक चर्चाएं की जाती है। ये अलग
बात है कि जो जेंडर जस्टीस की बात करते हैं वही बाद में उसी पर यौन शोषण का आरोप
लगता है। इस विश्वविद्यालय के कुछ छात्र कहें या छात्रनेताओं के शह पर आंतकवादियों
का महिमामंडित किया जाता है और देश की सैना को......जबकि यहां पढ़ने वाले छात्र
देश के ही टैक्सपेयर के पैसे से पढ़ाई कर पा रहे हैं,जिसमें सैनिकों के टैक्स भी
शामिल है।
यहां के एक छात्रनेता रातों-रात स्टार बन जाते हैं, जो कहिये जनाब! गरीबी का खुब मार्केंटिंग किया है इस लड़के
ने...कोई कह रहे थे कि इसकी मां मात्र 3000 रूपये के महीने से गुजारा करती है और
पिता अक्सर बिमार ही रहते हैं...लेकिन नसीब देखिये..9 फरवरी की घटना के बाद तो
आइफॉन से लेकर...मंहगे लिबास में देखे जा रहे हैं। महंगी चमचमाती कार में सवार
होकर सभा करने जाते हैं। अरे! ये तो कहना भूल ही गया कि
दिल्ली से बाहर जब जाना होता तो हवाई जहाज से अक्सर यात्रा होती है।
अब मुद्दे पर आते हैं..दुर्गापूजा के समय इस विश्वविद्यालय के एक छात्रसंगठन
के कुछ कार्यकर्ताओं के द्वारा देश के प्रधानमंत्री का पूतला(रावण के रूप में
बनाकर) जलाया गया...यह मुद्दा देश के मीडिया ने हाथों-हाथ लिया..भाई ले भी क्यों
नहीं देश के प्रधानमंत्री की बात है....उसके बात फिर से...
अब बीते कुछ दिनों की बात है, विश्वविद्यालय के एक छात्रावास में दो छात्रों
के बीच मामूली कहा सूनी हुई...यूं कहें तो
हाथापाई भी हुई....मामले ने तुल पकड़ लिया...विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के अध्यक्ष
बीच आ कूदे...दूसरे छात्रसंगठन वाले भी कहां मानने वाले थे..वे लोग भी झुंड में आ
गये... मामला कुछ हद तक शांत हुआ, वहां के वार्डेन ने उक्त छात्र जिसने थप्पड़
मारी थी, को शायद एक सप्ताह के अंदर छात्रावास छोड़ने तक को कह दी...
उसके बाद एक छात्र तीन दिन से छात्रवास नहीं लौटा..मामले ने फिर तुल पकड़ा..और
पकड़ना भी चाहिए..क्योंकि छात्र अल्पसंख्यक समुदाय से संबध रखता है...अब दूसरे
छात्रसंगठन पर य़ह आरोप मढने की कोशिश की जा रही है कि उक्त संगठन ने ही गायब किया है...जिस संगठन पर आरोप लगा
है..उसके नेता कह रहे हैं कि मामले को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही
है...
अब कितना सच है..और कितना झुठ ये तो समय बतायेगा...फिलहाल मजे लीजिए..और
आगे-आगे देखते जाइये होता है क्या.......