ख्वाब
जो कभी मरता नहीं...ख्वाब ही तो जिंदगी है।
ख्वाब
हर रात को मेरे पास आती है..नींद खुलने के पहले चली जाती है।
पूरा
दिन ख्वाब को पूरा करने में व्यस्त रहते हैं...लेकिन वो पूरा होता नहीं।
थक
कर वापस शाम में घर जाते हैं...निराश हो बैठ जाता हूं...
तभी
ख्वाब आती है और हमें जगाती है फिर ख्वाब में खो जाता हूं..
अजीब
एहसास है ये ख्वाब... जो कभी पूरी होती नहीं...
अपने
ख्वाब को कभी हकीकत में उतरता देखा नहीं...
फिर
भी न जाने उसके पास होने का एहसास होता है...
ये
ख्वाब ही तो है जो हमें रोज रोज जीने का कारण देता है..
ख्वाब
न होता तो यह जीवन कब का निरस हो गया होता...
ख्वाब
कुछ पाने का..ख्वाब कुछ हासिल करने का..
ख्वाब
आगे बढ़ने का...ख्वाब आसमान को छुने का..
ख्वाब
सफलता के सर्वोच्च शिखर पर जाने का..
ख्वाब
हर तरफ छा जाने का.. ख्वाब प्रसिद्धि का..
बचपन
में जब दोस्तों को टॉफी खाते देखते, तो टॉफियों को पाने का ख्वाब...
स्कूल
में छुट्टि खत्म होने का बेसब्री से इंतजार और दोस्तों के साथ खेलने का ख्वाब..
कभी-कभी
सोचता हूं कि गर ख्वाब नहीं होता तो कैसा होता..
फिर
मन में आता कि ख्वाब नहीं होता तो जिंदगी का मकसद क्या होता..
जब
कभी निराश हो जाता हूं तो ख्वाब ही तो जो हमें ताजगी देती है..
बचपन
में जवानी का ख्वाब...जवानी में शोहरत का ख्वाब..
और
सब पाकर फिर से बच्चा बन जाने का ख्वाब..
ख्वाब
कभी पूरे नहीं हुए और कई दिन कई रातें यूं ही बितती गई......