न सम्मान का मोह और न अपमान का भय। मनमस्त फकीरी धारी हूं.....बार-बार गिरता हूं ,सभंलता हूं और फिर चलता हूं...। मन में विश्वास लिए रगो में उत्साह लिए बस चलते रहता हूं....। जिदंगी में किसी को गिराकर उठने का शौख नहीं...किसी को नीचा दिखाना मेरी हसरत नहीं...अपेक्षा तो किसी से रखना सीखा नहीं...। जय हिन्द..जय भारत..वन्दे मां भारती...
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